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मैं भारत का नागरिक हूँ - ज़बरदस्त हिंदी कविता | FullFunCity
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मैं भारत का नागरिक हूँ – ज़बरदस्त हिंदी कविता

Written by Jiya Sharma

मैं भारत का नागरिक हूँ,

_मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिये।
-बिजली मैं बचाऊँगा नहीं,

_बिल मुझे माफ़ चाहिये ।
-पेड़ मैं लगाऊँगा नहीं,

_मौसम मुझको साफ़ चाहिये।
-शिकायत मैं करूँगा नहीं,

_कार्रवाई तुरंत चाहिये ।
-बिना लिए कुछ काम न करूँ,

_पर भ्रष्टाचार का अंत चाहिये ।
-घर-बाहर कूड़ा फेकूं,

_शहर मुझे साफ चाहिये ।
-काम करूँ न धेले भर का,

_वेतन लल्लनटाॅप चाहिये ।
-एक नेता कुछ बोल गया सो

_मुफ्त में पंद्रह लाख चाहिये।
-लाचारों वाले लाभ उठायें,

_फिर भी ऊँची साख चाहिये।
-लोन मिले बिल्कुल सस्ता,

_बचत पर ब्याज बढ़ा चाहिये।
-धर्म के नाम रेवडियां खाएँ,

_पर देश धर्मनिरपेक्ष चाहिये।
-जाती के नाम पर वोट दे,

_अपराध मुक्त राज्य चाहिए।
-टैक्स न मैं दूं धेलेभर का,

-विकास मे पूरी रफ्तार चाहिए ।
-मैं भारत का नागरिक  हूँ ,

_मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिए।

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