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अपना बिहार - हास्यकर हिंदी कविता | FullFunCity
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अपना बिहार – हास्यकर हिंदी कविता

Written by Love

मधुशाला : बिहार संस्करण

(हरिवंशराय ‘बच्चन’ की स्मृति को विनम्र अभिवादन कर)

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*पटना छपरा दरभंगा तक*

*सूख गया रस का प्याला*

*हाजीपुर के पुल पर केले*

*अब बेच रही है मधुबाला*
*महफिल  अब  वीरान  हुई*

*और नाच खतम नागिन वाला*

*बुझे बुझे अब लगे बराती*

*मस्ती  पर  डाका  डाला*
*घर-घर जाकर सूँघ रहा है*

*मुखड़ा सबका पुलिसवाला*

*हत्यारे बलात्कारी रंगदारों से*

*अपराधी बड़ा अब पीनेवाला*
*सुन भाई बिहार में नया*

*फरमान चला नीतीशवाला*

*पीकर गर ससुराल गये तो*

*जेल जाएगा ससुरा – साला*
*खेतो में अब छिपछिपकर*

*मदिरा पीता पीनेवाला*

*दो सौ का अब मिलता है*

*पव्वा वो चालीस वाला*
*बलिया वाली ट्रेन पकड़कर*

*बाहर को जाता पीनेवाला*

*बंगाल यूपी नेपाल झारखंड में*

*अब बुझती दिल की ज्वाला*
*राज्य में अंधेर मचा और*

*उद्योगों पर लटका है ताला*

*सीएम अपने बेखबर सभी से*

*जपते शराबबंदी की माला*
*नया कानून बना बिहार में*

*पर है बड़ा गड़बड़झाला*

*यहां बनी विष से भी घातक*

*पैमाने से छलकती हुई हाला*
*वोट दिलाते मंदिर मस्जिद*

*अब जेल कराती मधुशाला*

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– कवी अज्ञात

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