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सावन का आखिरी सप्ताह, खौफ में मुर्गे और बकरे, बकरा मुर्गा जोक्स | FullFunCity
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सावन का आखिरी सप्ताह, खौफ में मुर्गे और बकरे, बकरा मुर्गा जोक्स

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Written by Arendra Rajpoot

सावन का महीना खत्म होने को है तो एक बार फिर नॉनवेज खाने वालों की हसरतें हिलोरे मारने लगी हैं। इसे देख मुर्गों और बकरों के परिवारों में मातमी सन्नाटा पसर गया है। मुर्गी बहनें और माएं, अपने खसम और बेटों को डबडबाई आंखों से देख रही हैं कि न जाने कब पिंजरे वाली गाड़ी उन्हें उल्टा लटका कर ले जाए।

बकरा बाबू इतने टेंशनाइज में हैं कि कभी भी मिमियाने लग जा रहे हैं। जहन में अब्बू की बिना गर्दन वाली उल्टी लटकी तस्वीर बार-बार जिंदा हो जा रही है।  जैसे-जैसे ये हफ्ता खत्म हो रहा है वैसे-वैसे उनकी माथे पर चिंता की सींघें बढ़ते जा रही हैं।

नोएडा की खोड़ा कॉलोनी, चौड़ा मोड़, हरोला और बरोला समेत तमाम इलाकों में नॉनवेज ठेलों-खुमचों लगाने वालों के चेहरे खिलने लगे हैं।

शाकाहार बनाता है सेहतमंद

हमने इस खबर को मजाकिया लहजे में इसे दिलचस्प बनाने के मकसद से लिखा है, लेकिन इसके जरिए हम किसी भी प्रकार से इस नॉनवेज के चलन को बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं। बल्कि ताजा वैज्ञानिक शोधों से यह बात साबित हुई है कि इंसान के लिए शाकाहारी भोजन ही सर्वोत्तम भोजन है।

मेहनत करे मुर्गी अण्डा खाए फ़क़ीर!

एक बार एक किसान का घोडा बीमार हो गया। उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया बोला, “आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक नहीं तो हमें इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फ़ैल सकती है।”
यह सब बातें पास में खड़ा एक बकरा भी सुन रहा था।

अगले दिन डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी चला गया। उसके जाने के बाद बकरा घोड़े के पास गया और बोला, “उठो दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे।”

दूसरे दिन डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया।

बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला, “दोस्त तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो नहीं तो तुम मारे जाओगे। मैं तुम्हारी मदद करता हूँ। चलो उठो”

तीसरे दिन जब डॉक्टर आया तो किसान से बोला, “मुझे अफ़सोस है कि हमें इसे मारना पड़ेगा क्योंकि कोई भी सुधार नज़र नहीं आ रहा।”

जब वो वहाँ से गए तो बकरा घोड़े के पास फिर आया और बोला, “देखो दोस्त, तुम्हारे लिए अब करो या मरो वाली स्थिति बन गयी है। अगर तुम आज भी नहीं उठे तो कल तुम मर जाओगे। इसलिए हिम्मत करो। हाँ, बहुत अच्छे। थोड़ा सा और, तुम कर सकते हो। शाबाश, अब भाग कर देखो, तेज़ और तेज़।”

इतने में किसान वापस आया तो उसने देखा कि उसका घोडा भाग रहा है। वो ख़ुशी से झूम उठा और सब घर वालों को इकट्ठा कर के चिल्लाने लगा, “चमत्कार हो गया। मेरा घोडा ठीक हो गया। हमें जश्न मनाना चाहिए। आज बकरे का गोश्त खायेंगे।”

शिक्षा: मैनेजमेंट को भी कभी पता नहीं चलता कि कौन सा कर्मचारी कितना योग्य है।

एक इंसान की व्यथा

स्कूल में मुर्गा बना, नौकरी में बकरा और शादी के बाद गधा बना।

साली ज़िंदगी नॉनवेज होटल का मेन्यू बनकर रह गई है।

“एक दुःखी पति”।

 

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